
बाँवरे क्यों गबराता है
बाँवरे क्यों गबराता है
श्याम शरण में आजा ये सारे कष्ट मिटाता है
अपने जब होते पराये ये अपना बन के आये,
थाम ले ये हाथ पल में साथी हारे का कहाए ,
हो इनके होते धीर क्यों खोता क्यों नीर बहाता है
है सुख दुःख खेल इसी के जैसे चाहे ये खिलाये,
देख के दुःख में भगत को चैन इसको भी न आये ,
रखता लाज सदा भगतो की दोडा आता है ,
तू कर दे तन मन अर्पण करदे चरणों में समपर्ण,
श्याम संग प्रीत लगा ले सफल जीवन ये बना ले
देख भाव भगतो के पल में रीज ये जाता है
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