
बैगा बैगा आओ गजानंद,
ओ थारी खूब करा रे मनुहार,
पधारों म्हारा गजानंद।।
पार्वती के पुत्र गजानंद,
थे तो शिव के राज दुलार,
घी सिंदूर रो चोलो चढ़ावा,
ओ थारे चांदी रो करा श्रृंगार,
लडुवन को थारे भोग लगावा,
ओ थाके फूला रो पहनावा हार,
रणतभवर का प्यारा गजानंद,
ओ थाकु पूजे जग संसार,
रिद्धि सिद्धि संग में लावो,
शिव पार्वती संग आओ,
‘अ क जांगिड़’ दास पुराणों,
थे तो भक्ता की करो पूरी आश,
– गायक / लेखक / प्रेषक –
अशोक कुमार जांगिड़।
सवाई माधोपुर राजस्थान।
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