
बैठ मेरे बाण पे रे
बैठ मेरे बाण पे रे, बजरंग देउं तुरन्त पुचाय,
बिण सोच्या अणजान म्, रे दीन्हो बाण चलाय।
1. तू बड़भागी मोकलो रे, बजरंग सरजीवन ले जाय,
में निरभागी हूं इस्यो रे बिरा, म्हाने दियो रे राज सम्भलाय।
2. म्हासे तो पत्थर भला रे बीरा, ज्याने जल पे दिया तिराय,
भाई हूं पण भरत न, बजरंग दियो राम छिटकाय।
3. लिछमण म्हारो धन्य है रे बिरा, ज्याकि धन्य सुमित्रा माय,
म्हारी किस्मत के केवा रे, हनुमत सरवस दियो रुळाय।
4. सूरज के म्हे वंश का बिरा, बो तो उगसी चेत कराय,
थां पुग्या बिन ना उगे रे बजरंग मना “नवल” घबराय।
1: इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जीवन में कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन अगर हम हनुमान जी की भक्ति में खुद को समर्पित करें, तो वे हमें हर विपत्ति से उबारने की शक्ति देंगे। हनुमान जी की तरह हमें भी अपने कार्यों को साहस और समर्पण के साथ करना चाहिए।
2: “बैठ मेरे बाण पे रे” का क्या अर्थ है?
उत्तर: “बैठ मेरे बाण पे रे” का अर्थ है कि हनुमान जी को अपने बाण पर बैठाने की प्रार्थना करना, ताकि वे तुरंत कार्यवाही करें और संकट से मुक्ति दिलाएं। यह भगवान पर विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।
3: इस भजन के गायक कौन हैं?
उत्तर: इस भजन के गायक सुमित कालानौर हैं, जो भक्ति संगीत के प्रसिद्ध कलाकार हैं।
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