
भक्तो ने झूला डाला झूले पे खाटू वाला
भक्तो ने झूला डाला झूले पे खाटू वाला
बैठा बैठा मुस्काये हमे झाला दे बुलाया
वो कहता है डोर हिलाओ तुम
मुझको तो झुलाओ तुम
सावन का महीना रिमझिम बरशे पानी
आया है खाटू से चलकर शीश का दानी
भक्तो ने इसे बुलाया
ये प्रेम देखकर आया
ये कहता है डोर हिलाओ तुम
धीरे धीरे प्रेमी डोरी हिला रहे है
इतने खुश है सारे प्रभु को झूला रहे है
जब कोई कभी रुक जाता मेरा श्याम घणी फरमाता
मस्ती में बैठा है बडॉ मजा है आता
कभी कभी झूले में खुद ही जोर लगाता
ये उचक उचक कर झूले,
लगता है छत को छूले
मुझको तो हिलाओ तुम
सावन का झूले का ये सौकीन पुराना
मन में न राह जाए इतना इसे झुलाना
देखो तुम गौर करो न
देखो मेरा श्याम सलोना
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