
भजन श्याम के गा ले रे बन्दे कल रहे ना रहे
मेरे सांसो की सरगम ये कहे,
मेरे भजनों की धुन भी ये कहे,
भजन श्याम के गा ले रे बन्दे,
कल रहे ना रहे।।
कौन जाने किस गली में,
जिंदगी की शाम हो,
उसके पहले ये जिंदगी,
श्याम के ही नाम हो,
किसने दी है दिल को पीड़ा,
याद रहे ना रहे,
फूलों सी ये जिंदगी तो,
एक दिन मुरझायेगी,
हम रहे या ना रहे,
ये यादे ही रह जाएगी,
यादे ही रह जाएगी,
चलता रहे भजनों का सफर ये,
जाँ रहे न रहे,
है हकीकत मौत अपनी,
एक दिन तो आएगी,
पल दो पल की जिंदगी फिर,
खाक में मिल जाएगी,
हम रहे ना रहे,
लेखक – स्व. श्री रमेश जी वर्मा “विमलेश”
कवि व गीतकार, रतलाम म. प्र.
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