
भले भेरूजी सोनाला नगरी में,
अरे भले खेतलाजी सोनाला नगरी में,
ओ थोरो मंदिर बनीयो जोर रो रे जियो।।
अरे भले भेरूजी दूरा ने दूरा रे,
भले खेतलाजी दूरा ने दूरो रा,
घना आवे थोरे जातरू रे जी हा,
आवे थोरे जातरू रे जी हा।।
ओ अरे भले भेरूजी,
सुखीया ने दुखीया तो,
अरे भले खेतलाजी सुखीया दुखीया,
चरना मे थोरे आविया रे जी हा,
अरे भले भेरूजी सुखीया ने दुखीया,
तो चरने थोरे आविया रे जी हा।।
ढोला रे डमाके,
भले भेरूजी ढोला रे डमाके,
ओ थेतो रमता रमता आवजो ओ जियो,
अरे भले भेरूजी ढोला रे डमाके,
थेतो रमता रमता आवजो ओ जियो।।
अरे भले भेरूजी कोसेलाव नगरी ती,
ओ भले खेतलाजी कोसेलाव नगरी ती,
दर्शन थोरे आविया रे जी हा,
अरे भले भेरूजी कोसेलाव नगरी सु,
ओ अरे भले भेरूजी भोपोजी चेलोजी ओ,
भले खेतलाजी भोपोजी चेलोजी,
वेतो माला थोरी फेरता हो जी,
अरे भले भेरूजी चेलोजी भोपोजी,
वेतो चरने थोरे आविया हो जी।।
गायक – संत कन्हैयालाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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