
सोऊंन महीना चढ़या पीपली पींघा पाईया ने,
पींघां झूटन मईया दे नाल कंजका आईआ ने।
देखन अजब नज़ारा आके.....चन्न सूरज ते तारे,
मईया पींघा झूटदी.....जय हो....कंजका देन हुलारे।
मईया पींघा झूटदी कंजका देन हुलारे।।
विष्णु अते ब्रम्हा शिव भोले भंडारी जी,
देखन आये माता जी दी लीला न्यारी जी.....-2
जय माता दी बोलदे ने अज्ज.....हथ जोड़ के सारे,
धरती नचदी, अंबर झूमे, नच पाताल रिहा,
देख देख खुश हुन्दे एह जो हो कमाल रिहा.....-2
खुशियाँ दे विच देखो सारे.....लाउन माँ दे जयकारे,
सिर ते मुकट सोने दा बाहीं चूढ़ा पाया ए,
मईया जी ने बहुत सोहना रूप बनाया ए....-2
हथा वाली मेहँदी दा दूरो....पैंदा ए लिशकारा,
सब दे दिलां दी जानन वाली शेरावालीं माँ,
कंजका दे नाल पींघां झूटदी मिहरावाली माँ....-2
बिट्टू ते सुखराज लिखारी.....एहो सच उचारे,
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