
मन बैचैन हुआ रे तेरे दर्शन को,
पार करने है दस दरवाजे,
हो पार करने है दस दरवाजे,
प्रभु जी मन बैचैन हुआ रे तेरे दर्शन को,
पहली सीढ़ी प बैठु ध्यान लगाए,
दूसरी पे मन में उजाला भर जाये,
तीसरी प लाखो सूरज रोशनी उगाये,
चौथी सीढ़ी पर गीत झरने भी गाये,
पांचवी पे गूंजे झंकार की सदाए,
छठवीं पे धरती का सवर्ग लहराए,
सातवीं सीढ़ी पे प्रेम ज्योत जगमाये,
आठवीं पे मन निर्मल हो जाये,
नौवीं पे मन की हरतिष्टा मिट जाये,
दसवीं सीढ़ी पे तेरा दर्शन हो जाये,
जो भी ये दरवाजे पर कर जाये,
उसको को तो जीवन में मोक्ष मिल जाये,
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