
मस्तानी मालण,
हरि रस प्यालो भरदे,
थारी सुरता समझ ने बोल रे,
नैणो रा परदा खोल रे,
अखियो रा परदा खोल रे,
अन्दर क्या बोले भाई रे हां,
अरे उण परदा में राम बसे है,
उण परदा में राम बसे है,
म्हारा सतगुरु आगल खोल रे,
धिनगुरुजी आगल खोल रे,
मस्तानी मालन,
हरि रस प्यालो भरदे,
हरि रस प्यालो भरदे,
गुरु रस प्यालो भरदे,
म्हारी लेहरो दिवानी,
हरि रस प्यालो भरदे।।
हे जपे नी हंसा,
नाभी कमल रा जाप रे,
म्हारा सतगुरु मान्डी हाठ रे,
म्हारा धिनगुरु मान्डी हाठ रे,
गुरु भाई ई रे हां,
अरे उण हाठो रा सोदा करले,
अरे उण हाठो रा सोदा करले,
तने सब कुछ आवे हाथ रे,
भाया सब कुछ आवे हाथ रे,
नखराली सुरता,
बहुरन्ग प्यालो भरदे,
मस्तानी मालन,
हरि रस प्यालो भरदे,
हरि रस प्यालो भरदे,
गुरु रस प्यालो भरदे,
म्हारी लेहरो दिवानी,
हरि रस प्यालो भरदे।।
अरे जपो नी हंसा,
त्रिवेणियों रा जाप रे,
उठे सतगुरु मोन्डियो बाग रे,
उठे धिनगुरु मोन्डियो बाग रे,
गुरु भाई ई रे हां,
उण बागों रो भंवरों बणजा,
उण बागों रो भंवरों बणजा,
फल फूल आवे हाथ रे,
उठे फल फूल आवे हाथ रे,
नखराली सुरता,
बहुरन्ग प्यालो भरदे,
मस्तानी मालन,
हरि रस प्यालो भरदे,
हरि रस प्यालो भरदे,
गुरु रस प्यालो भरदे,
म्हारी लेहरो दिवानी,
हरि रस प्यालो भरदे।।
हे माली लिखमोजी,
सत सेवता,
हे म्हारा सतगुरु किना हेत रे,
म्हारा धिनगुरु किना हेत रे,
गुरु भाई ई रे हां,
अमरित बुन्दा बरसण लागी,
अमरित बुन्दा बरसण लागी,
निपजण लाग्या खेत रे,
उठे निपजण लाग्या खेत रे,
नखराली सुरता,
बहुरन्ग प्यालो भरदे,
मस्तानी मालन,
हरि रस प्यालो भरदे,
हरि रस प्यालो भरदे,
गुरु रस प्यालो भरदे,
म्हारी लेहरो दिवानी,
हरि रस प्यालो भरदे।।
मस्तानी मालण,
हरि रस प्यालो भरदे,
थारी सुरता समझ ने बोल रे,
नैणो रा परदा खोल रे,
अखियो रा परदा खोल रे,
अन्दर क्या बोले भाई रे हां,
अरे उण परदा में राम बसे है,
उण परदा में राम बसे है,
म्हारा सतगुरु आगल खोल रे,
धिनगुरुजी आगल खोल रे,
मस्तानी मालन,
हरि रस प्यालो भरदे,
हरि रस प्यालो भरदे,
गुरु रस प्यालो भरदे,
म्हारी लेहरो दिवानी,
हरि रस प्यालो भरदे।।
स्वर – सुरेश लोहार।
प्रेषक – कुलदीप सिंह राजपुरोहित।
9468586253
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