
पुष्पांजलि गीत संपूर्ण मंत्र पुष्पांजलि
Pushpaanjali Giit Sanpuurn Mantr Pushpaanjali lyrics
पुष्पांजलि गीत संपूर्ण मंत्र पुष्पांजलि,
कर्पूर गौरम करूणावतारं,
संसार सायं भुजगेन्द्र हारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे,
भवं भवानी सहितं नमामि।।
सानन्द मानन्द वने वसनतं,
आनन्द कन्दं हृत पाप वृनदं।
काशीनाथमनाथ नाथन,
श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये।।
व्रजे वसनतं नवनीतचौरं,
गोपांगनानां च दुकूलचौरं।
अनेक जन्मार्जित पाप चौरं,
चौराग्रगण्यं शरणं प्रपद्ये।।
नीलांबुजश्यामल कोमलांगं,
सीतासमारोपितवामभागम।
पाणौमहाशायकुचारचापं,
नमामि रामं रघुवंशनाथं।।
मनोजवं मारुततुल्यवेगमं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद,
मातर्जगतोऽखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं,
त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।
सेवन्तिका बकुल चम्पक पाटलाब्जै,
पुन्नाग नाग रसालपुष्पै।
विल्व प्रवाल तूलसी मन्जीरिभि:,
त्वं पूजयामि परमेश्वर में प्रसीद।।
– मंत्र पुष्पांजलि –
* प्रथम:
ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन् ।
ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा: ॥
* द्वितीय:
ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने।
नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे।
स मस कामान् काम कामाय मह्यं।
कामेश्र्वरो वैश्रवणो ददातु कुबेराय वैश्रवणाय।
महाराजाय नम: ।
* तृतीय:
ॐ स्वस्ति, साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं
वैराज्यं पारमेष्ट्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं ।
समन्तपर्यायीस्यात् सार्वभौमः सार्वायुषः आन्तादापरार्धात् ।
पृथीव्यै समुद्रपर्यंताया एकराळ इति ॥
* चतुर्थ:
ॐ तदप्येषः श्लोकोभिगीतो।
मरुतः परिवेष्टारो मरुतस्यावसन् गृहे।
आविक्षितस्य कामप्रेर्विश्वेदेवाः सभासद इति ॥
॥ मंत्रपुष्पांजली समर्पयामि ॥
– संपूर्ण मंत्र पुष्पांजलि –
हरि: ॐ एक दंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दंतीप्रचोदयात्।।
हरि:ॐ नारायण विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्।।
हरि:ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।।
हरि: ॐ नंद नन्दनाय विद्महे यशोदा नंदनाय धीमहि।
तन्नो श्री कृष्ण: प्रचोदयात्।।
हरि ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्यकुमारी च धीमहि।
तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्।।
हरि: ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि।
तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्।।
हरि ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि।
तन्नो रामः प्रचोदयात्।।
ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै च धीमहि।
तन्नो सीता प्रचोदयात्।।
हरि ॐ अंजनी सुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत प्रचोदयात्।।
हरि ॐ चतुर्मुखाय विद्महे हंसारुढ़ाय धीमहि।
तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्।।
हरि: ॐ परमहंसाय विद्महे महाहंसाय धीमहि।
तन्नो हंसः प्रचोदयात्।।
हरि: ॐ श्री तुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै च धीमहि।
तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।
हरि: ॐ वृषभानुजायै च विद्महे कृष्णप्रियायै च धीमहि।
तन्नो राधा प्रचोदयात्।।
हरिः ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।।
ॐ सेवन्तिका बकुल चम्पक पाटलाब्जै,
पुन्नाग जाति करवीर रसाल पुष्पैः बिल्व प्रवाल।
तुलसीदल मंजरीभिस्त्वां पूजयामि जगदीश्वर मे प्रसीद।।
मंदार माला कुलितालकायै कपालमालांकित शेखराय,
दिगम्बरायै च दिगम्बराय नमः शिवायै च नमः शिवाय।
ॐ नाना सुगन्धि पुष्पाणि यथा कालो भवानी च,
पुष्पान्जलिर्मया दत्त ग्रहाण परमेश्वर।।
मंत्र पुष्पांजली समर्पयामि।
प्रेषक – पंडित गोविंद प्रसाद मिश्र।
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