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महेंद्र कपूर के लोकप्रिय भजन

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॥ श्री ॥

भारतीय भक्ति संगीत में सबसे लोकप्रिय और दिल को छू लेने वाले भजनों में से एक हैं।

महेंद्र कपूर जो अपनी शक्तिशाली और मधुर आवाज़ के लिए जाने जाते थे, ने भजन संगीत में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उनकी गहरी आस्था और बहुमुखी गायकी ने उन्हें भक्ति संगीत के क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान दिलाया है।

महेंद्र कपूर का जन्म 9 जनवरी 1934 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था और वे बॉलीवुड के सबसे प्रमुख पार्श्व गायकों में से एक बने।

वे विशेष रूप से देशभक्ति गीतों और भक्ति भजनों के लिए जाने जाते थे।

उन्हें फ़िल्म पाकीज़ा के गीत “चलो दिलदार चलो” के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला।

हालांकि महेंद्र कपूर द्वारा गाए गए शीर्ष भजन ने भी उन्हें धार्मिक संगीत के क्षेत्र में अपार लोकप्रियता दिलाई।

में “ओम जय जगदीश हरे” और “भारत का रहने वाला हूँ” जैसे प्रसिद्ध ट्रैक शामिल हैं।

उनके भजनों में गाए गए शब्दों और उनकी आवाज़ में एक गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस होता था जो भक्तों के दिलों में उतर जाता था।

उनकी विशिष्ट शास्त्रीय स्पर्श वाली आवाज़ भक्ति संगीत के लिए एकदम उपयुक्त थी, इसलिए

आज भी लोगों के बीच पसंद किए जाते हैं।

महेंद्र कपूर का निधन 27 सितंबर 2008 को हुआ, लेकिन बॉलीवुड और भक्ति संगीत में उनका योगदान आज भी जीवित है।

विशेष रूप से

आज भी दुनिया भर में श्रोताओं को प्रेरित और सांत्वना देते हैं।

यदि आप सबसे प्रतिष्ठित भजनों की खोज कर रहे हैं, तो

किसी भी आध्यात्मिक प्लेलिस्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

महेंद्र कपूर का देशभक्ति और भक्ति संगीत से जुड़ाव उन्हें भारतीय संगीत इतिहास में एक अमिट स्थान दिलाता है।

पीढ़ियों के बीच आज भी बेहद प्रिय हैं और उन्हें भारतीय संगीत के महान पार्श्व गायकों में से एक के रूप में स्थापित करते हैं।

मात अंग चोला साजे

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है

एक जुग से में तरसा शेरावालिये

जय संतोषी माँ

ओम जय जगदीश हरे

रघुपति राघव राजा राम

जय जय जय बजरंगबली

मन तेरा मंदिर आँखे दिया बाती

दुनिया में तेरा है बड़ा नाम

तेरे नैना क्यों भर आये

कन्हैया कन्हैया तुझे आना पड़ेगा

ओ शंकर मेरे, कब होंगे दर्शन तेरे

ओ मनवा रे जीवन है संग्राम

बम बम भोले जय शिव शम्भू

जगत के कण-कण में भगवान

हर रंग चोला साजे

मात की महिमा देखो,

ज्योत दिन रैना जागे

तू ओढे लाल चुनरिया,

गहनो से करे श्रृंगार

शेरो पर करे सवारी,

तू शक्ति का अवतार

तेरे तेज बहरे दो नैना,

तेरे अधरों पर मुस्कान

तेरे द्वारे शीश झुकाये,

क्या निर्धन क्या बलवान

तेरे ही नाम का मात,

जगत में डंका बाजे

ऊँचा है मंदिर तेरा,

ऊँचा तेरा अस्थान

दानी क्या कोई दूजा,

माँ होगा तेरे सामान

जो आए श्रद्धा लेके,

वो ले जाए वरदान

हे माता तू भगतो के,

सुख दुःख का रखे ज्ञान

तेरे चरणो में आके,

भाग्य कैसे ना जागे

जय बोलो जय माता दी, जय हो…

जो भी दर पे आए, जय हो…

वो खाली न जाए, जय हो…

सबके काम है करती, जय हो…

सबके दुखरे हरती, जय हो…

मैया मेरी शेरोवाली, जय हो…

भरदे झोली खाली, जय हो…

सारे जग को खेल खिलाये

बिच्डो को जो खूब मिलाये

पूरे करे अरमान जो सारे,

देती है वरदान जो सारे

॥दोहा॥

माता जिनको याद करे,

वो लोग निराले होते हैं ।

माता जिनका नाम पुकारे,

किस्मत वाले होतें हैं ।

चलो बुलावा आया है,

माता ने बुलाया है ।

ऊँचे पर्वत पर रानी माँ ने,

दरबार लगाया है ।

सारे जग मे एक ठिकाना,

सारे गम के मारो का,

रास्ता देख रही है माता,

अपने आंख के तारों का ।

मस्त हवाओं का एक झोखा,

यह संदेशा लाया है ।

जय माता दी॥ जय माता दी ॥

जय माता की कहते जाओ,

आने जाने वालो को,

चलते जाओ तुम मत देखो,

अपने पीछे वालों को ।

जिस ने जितना दर्द सहा है,

उतना चैन भी पाया है ।

वैष्णो देवी के मन्दिर मे,

लोग मुरादे पाते हैं,

रोते रोते आते है,

हस्ते हस्ते जाते हैं ।

मैं भी मांग के देखूं,

जिस ने जो माँगा वो पाया है ।

मैं तो भी एक माँ हूँ माता,

माँ ही माँ को पहचाने ।

बेटे का दुःख क्या होता है,

और कोई यह क्या जाने ।

उस का खून मे देखूं कैसे,

जिसको दूध पिलाया है ।

प्रेम से बोलो, जय माता दी ॥

ओ सारे बोलो, जय माता दी ॥

वैष्णो रानी, जय माता दी ॥

अम्बे कल्याणी, जय माता दी ॥

माँ भोली भाली, जय माता दी ॥

माँ शेरों वाली, जय माता दी ॥

झोली भर देती, जय माता दी ॥

संकट हर लेती, जय माता दी ॥

ओ जय माता दी, जय माता दी ॥

दर्शन को तेरे मैं जोता वालिये,

पहाडा वालिये दिलासा वालिये,

तेरी भक्ति तेरी पूजा अब तो जीवन मेरा,

तेरे कदमो में दम निकले मन चाहे मेरा

दर्शन के प्यासे भक्तो ने कैसे तुझे पुकारा,

सब कुछ सम्ब हो सकता है अद्भुत तेरी माया,

रूप अनेको दिए है तूने बदली तेरी माया,

एक वार नही कई बार इन भक्तो ने तुझे है पुकारा,

यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ, मत पूछो कहाँ-कहाँ है सँतोषी माँ !

अपनी सँतोषी माँ, अपनी सँतोषी माँ…

जल में भी थल में भी, चल में अचल में भी, अतल वितल में भी माँ !

बड़ी अनोखी चमत्कारिणी, ये अपनी माई

राई को पर्वत कर सकती, पर्वत को राई

द्धार खुला दरबार खुला है, आओ बहन भाई

इस के दर पर कभी दया की कमी नहीं आई

पल में निहाल करे, दुःख का निकाल करे, तुरंत कमाल करे माँ !

इस अम्बा में जगदम्बा में, गज़ब की है शक्ति

चिंता में डूबे हुय लोगो, कर लो इस की भक्ति

अपना जीवन सौंप दो इस को, पा लो रे मुक्ति

सुख सम्पति की दाता ये माँ, क्या नहीं कर सकती

बिगड़ी बनाने वाली, दुखड़े मिटाने वाली, कष्ट हटाने वाली माँ !

गौरी सुत गणपति की बेटी, ये है बड़ी भोली

देख – देख कर इस का मुखड़ा, हर इक दिशा डोली

आओ रे भक्तो ये माता है, सब की हमजोली

जो माँगोगे तुम्हें मिलेगा, भर लो रे झोली

उज्जवल-उज्जवल, निर्मल-निर्मल सुन्दर-सुन्दर माँ !

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट

क्षण में दूर करे ॥ ॐ जय जगदीश हरे

भक्त ज़नो के संकट दास ज़नो के संकट

जो ध्यावे फल पावे दुःख बिन से मन का,

स्वामी दुख बिन से मन का ।

सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे

कष्ट मिटे तन का ॥ ॐ जय जगदीश हरे

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी ।

स्वामी शरण गहूं किसकी,

तुम बिन और ना दूजा, तुम बिन और ना दूजा

आस करूँ जिसकी ॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरियामी

स्वामी तुम अंतरियामी ,

पार ब्रह्म परमेश्वर, पार ब्रह्म परमेश्वर

तुम सबके स्वामी ॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम करुणा के सागर, तुम पालन करता

स्वामी तुम पालन करता ।

मैं मूरख खलकामी ,मैं सेवक तुम स्वामी

कृपा करो भर्ता ॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राण पति

स्वामी सबके प्राण पति ।

किस विध मिलु दयामय, किस विध मिलु दयामय

तुम को मैं कुमति ॥ ॐ जय जगदीश हरे

दीन बन्धु दुःख हर्ता, ठाकुर तुम मेरे

स्वामी रक्षक तुम मेरे ।

अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ

द्वार पड़ा तेरे ॥ ॐ जय जगदीश हरे

विषय-विकार मिटाओ पाप हरो देवा,

स्वामी पाप हरो देवा ।

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ

सन्तन की सेवा ॥ ॐ जय जगदीश हरे

ओम जय जगदीश हरे ,स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त ज़नो के संकट, दास जनो के संकट

रघुपति राघव राजा राम , पतित पावन सीता राम ।

ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान ।

जो भी दिल से पुकारे तुमको….-2

उसकी विपदा पल मे टली

लक्ष्मण के थे प्राण बचाए,

पर्वत हथेली पर ले आए,

ऐसी बूटी दी लक्ष्मण को,

खिल उठी जीवन की कली,

रामजी ने संदेशा भिजवाया,

सीता माँ को यकीन ना आया,

तब हनुमान ने राम अंगूठी,

सीता मां की रख दी तली,

सेना ने पूंछ में आग लगाई,

सब सोने की लंका जलाई,

देखते देखते ही पल भर में,

सब सोने की लंका जली,

हनुमत जो कोई तुम्हे धयाता,

उसके दुख कभी निकट ना आता,

कहता है संदीप जलंधरी,

करते हो तुम सबकी भली,

होंठो की हैं थालियां बोल फूल पाती,

रोम रोम जिव्हा तेरा नाम पुकारती,

आरती ओ मैया आरती,

ज्योतावालिये माँ तेरी आरती ॥

हे महालक्ष माँ गौरी,

तुम अपनी आप है जौहरी,

तेरी कीमत तू ही जाने,

तू बुरा भला पहचाने,

यह कहती दिन और राते,

तेरी लिखी ना जाए बाते,

कोई माने या ना माने,

हम भक्त तेरे दीवाने,

तेरे पाँव सारी दुनिया पखारती ।

हे गुणवंती सतवंती,

हे पतवंती रसवंती,

मेरी सुनना यह विनंती,

मेरा चोला रंग बसंती,

हे दुःख भंजन सुखदाती,

हमें सुख देना दिन राती,

जो तेरी महिमा गाये,

मुह मांगी मुरादे पाए,

हर आँख तेरी और निहारती ।

हे महाकाली महाशक्ति,

हमें दे दे ऐसी भक्ति,

हे जगजननी महामाया,

है तू ही धुप और छाया,

तू अमर अजर अविनाशी,

तू अनमिट पूरणमाशी,

सब करके दूर अंधेरे,

हमें बक्शो नए सवेरे।

तू तो भक्तों की बिगड़ी संवारती ।

आज मुझे भी तुझसे पड़ गया काम

मेरी बिनती सुने तो जानूं

मानूं तुझे मैं राम

राम नहीं तो कर दूंगा

सारे जग में तुझे बदनाम

मैं नहीं कहता, कहते हैं सारे

तूने बनाए चाँद सितारे

तू दुःख दूर करे तो मेरे

मेरी बिगड़ी बनाए तो

तेरे गुण गाऊं सुबह-ओ-शाम

साथी जगत में बस एक अपना

इस जीवन का आखिरी सपना

वो भी तोड़ के दाता ना ले

यूँ मुँह मोड़ के दाता ना ले

सर पे तू ये इल्जाम

मजबूरी तेरे दर पे ले आई

आशा की मैंने ज्योत जगाई

ओ मन की बुझती ज्योत जगा दे

मेरी टूटी आस बंधा दे

आया मैं तेरे धाम

हो राम, हो राम

तेरे नैना क्यूँ भर आए

वो है सबका रखवाला, तू काहे को घबराए

ये आँसू और ये दुख सारे, ले जा प्रभु के द्वारे

वो ही टूटी आस बंधाए, बिगड़े काज संवारे

द्वार से उसके कोई खाली हाथ ना वापस जाए

जीवन की ये धूप ये छांव, सब है खेल तमाशा

मन से आँख-मिचौली खेले, आशा और निराशा

आज है दुख तो कल सुख होगा, काहे नीर बहाए

कन्हैया कन्हैया

कन्हैया कन्हैया तुझे आना पड़ेगा आना पड़ेगा .

वचन गीता वाला निभाना पड़ेगा ॥

गोकुल में आया, मथुरा में आ,॥

छवि प्यारी प्यारी कहीं तो दिखा,

अरे सांवरे देख आ के ज़रा,

सूनी सूनी पड़ी है तेरी द्वारिका,

जमुना के पानी में हलचल नहीं ॥

मधुबन में पहला सा जलथल नहीं ,

वही कुंज गलियाँ वही गोपिआँ,

छनकती मगर कोई झान्झर नहीं ,

कोई तेरी गैयाँ का वाली नही॥

अमानत यह तेरी सम्बली नही,

कई कंस भारत में पैदा हुए,

कपट से कोई घर खाली नही,

ओ शंकर मेरे,

कब होंगे दर्शन तेरे,

जीवन पथ पर शाम सवेरे,

छाए है घनघोर अँधेरे,

मैं मूरख तू अंतर्यामी,

मैं सेवक तू मेरा स्वामी,

काहे मुझसे नाता तोड़ा,

मन छोड़ा मंदिर भी छोड़ा,

कितनी दूर लगाये तूने,

जा कैलाश पे डेरे,

तेरे द्वार पे ज्योत जगाते,

युग बीते तेरे गुण गाते,

ना मांगू मैं हीरे मोती,

मांगू बस थोड़ी सी ज्योति,

खाली हाथ न जाऊँगा मैं,

दाता द्वार से तेरे,

राम राम राम

राम राम राम राम

राम राम राम राम राम राम

हे मनवा रे हे

मानव जीवन है संग्राम

ओ मनवा रे हे

मनवा जीवन है संग्राम

भजले राम राम राम

मनवा रे हे

लोक यहि परलोक यही है

यही धरा और व्योप

यही पुरसँ है नारायण

है यही सनातन ॐ

यही सनातन ॐ

इससे बड़ा नहीं कोई नाम

इसके करतब अजब अनोखी

गजब इसके खेल

सूर्य चन्द्र के दीप

जलाता बिन बाती बिन तेल

बिन बाती बिन तेल

यही सवारे सारे काम

जय बजरंग बली की जय

जय शिव शमभू किया करो दुःख न किसी को दिया करो,

तीन लोक का मालिक भोला नाम उसी का लिया करो,

महाकाल के हम है दीवाने,

पी के चिलम मन के मस्ताने,

भुत प्रेत भगोड़ी साधु मेरे शिव शंकर को माने,

शिव का भजन किया करो दुःख न किसी को दिया करो,

रूप भयंकर भोले तेरा स्मशानो में लावे डेरा,

मणि मसानी आत्मा मुर्दे दासी बन कर तेरी करते सेवा,

हर हर शंकर किया करो दुःख न किसी को दिया करो,

वर्णन करते कभी ना थकते जिनका वेद पुराण

विष्णु जी बसते है मन में लक्ष्मी जी बस्ती है धन में

रामचंद्र जी सब के तन में सीता जी प्रभु के कीर्तन में

जगत के प्राणों में बसते पवन पुत्र हनुमान

श्री कृष्ण बंशी की धुन में

राधा नाचे उनके संग में

पर्वत ऊपर शिवजी बसते गौरा जी है गंगा जमुना में

श्री गणेश जी बुद्धि बाटते मात शारदा ज्ञान

वर्णन करते कभी ना थकते

जिनका वेद पुराण

भाग्य में बस्ती भाग्य विधाता

सृष्टि के हैं वो निर्माता

सारे जगह संचालन में प्रमुख है सबसे दुर्गा माता

भक्तों की नैया के खेवईया कोटि-कोटि प्रणाम

वर्णन करते-करते कभी ना थकते

जिसका वेद पुराण

॥ जय हो ॥

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About this bhajan

Meaning, tradition and how to sing it

महेंद्र कपूर के लोकप्रिय भजन is a bhajan dedicated to Krishna Ji, sung in homes, temples, and community sabhas across India.

The bhajan opens with the line "Bhaaratiiy bhakti sangiit mein sabase lokapriy aur dil ko chuu lene vaale bhajanon mein se ek hain|", a verse devotees often recite while lighting the evening lamp or gathering for kirtan.

On this page you can read the complete lyrics in Hindi (Devanagari), Hinglish (Roman transliteration), English translation. Use the language toggle above to switch scripts, adjust the font size for comfortable reading, and save the bhajan to revisit during your next sabha or solo practice.

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