
तर्ज – तेरे मस्त मस्त दो नैन
माँगते रहते तुझसे सांझ सवेरे,
हाथ ये फेले रहते सामने तेरे,
तूने खूब दिया दाता,
तेरा बहुत बड़ा उपकार,
याद वो दिन मुझे,
खाली जेब वो मेरा,
दर दर भटकना हाए,
दर दर भटकना,
गैरो की क्या कहूं,
अपनो की आँख में,
रह रह खटकना हाए,
रह रह खटकना,
चारो तरफ थे मेरे,
गम के अंधेरे,
आख़िर में आया बाबा,
द्वार पे तेरे,
मेरी ग़रीबी के,
दिन थे वो कैसे,
तूने ही जाना बाबा,
तूने ही जाना,
तेरी कृपा से परिवार खा रहा,
भर पेट खाना बाबा,
देने को कुछ भी बाबा,
पास ना मेरे,
दबा जा रहा हू बाबा,
कर्ज में तेरे,
माँगना छोड़ दूँ,
मुमकिन नही मेरा,
आदत ना जाए मेरी,
आदत ना जाए,
तेरे आगे भोले,
कहता ‘पवन’ मुझे,
लाज ना आए बाबा,
लाज ना आए,
तभी तो मै आता बाबा,
सांझ सवेरे,
सदा हाथ फैले रहते,
सामने तेरे,
तूने खूब दिया......
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