
माता के टप्पे
गुण, तेरे ही, गाएंगे ॥
तेरा दिया, खाते हैं,
तेरा, शुक्र मनाएंगे ॥
ऐसी, रहमत, हुई है ॥
माँ ने हमको, गले लगाया,
हमें, मिल गई, छांव है ॥
माँ, मेहर बांटती है ॥
सबको लाल, बांटती,
और, नाम में, रंगती है ॥
तेरे, कदमों में, रहना है ॥
माँ, कदमों से, दूर ना करना,
बस, यही कहना है ॥
माँ ने, कर्म, कमाया है ॥
जो भटकते, फिरते थे,
हमें, प्यार जताया है ॥
सुर, अमन जो, गाती है ॥
यह माँ की, रहमत है,
यह, खुद बुलाती है ॥
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