
मात मोतियों वाली विराजे,
जसोल गढ़ रे माय,
छतर वाली छाया राखजो,
आयो थारे द्वार।।
ऊचो थारो बणयो देवरो,
भली भटियाणी माय,
सुनमुख रिजो म्हारी मावङी,
धरियो सिर पर हाथ,
आई तेरहस चांदणी मां,
चालो माता रे दरबार,
चरणे आया रा सकंट मेटे,
परसा हाथों हाथ,
अपरम्पार आपरा परसा,
ईण कलयुग रे माय,
खरो भरोचो आपरो मां,
रखियो म्हारी लाज,
जगमग थारी जोतो जगे,
निमण करें नर नार,
स्वरूप कवंर री सोभा घणेरी,
नवखंड प्रथवी माय,
मईया तेरे राज में,
कमी काहे की नाय,
जोगाराम प्रजापत गावे,
सांचों करें बखाण,
गायक / प्रेषक – जोगाराम प्रजापत।
हाथीतला बाङमेर, 9587984999
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