
मानव किसका अभिमान करें चेतावनी
मानव किसका अभिमान करें
दिन चढ़ते उतरकर आते है ।
कीसमत जौ साथ नहीं देती ,
पत्थर भी उछल कर आते है ।।
जिसके दरवाजे देव सभी ,
देने को सलामी आते हैं ।
किस्मत ने करवट ली पल में ,
पानी प पत्थर तीर जाते है ।।
गण राज रावण कुम्भकरण ,
रण में रणवीर कहाते है ।
उनकी सोने की लंका पर ,
वानर भी फ़तहे कर जाते है ।।
जिस की बाणो की वर्षा से ,
कही महा योद्धा घबराते है ।
अर्जुन के जसा धनुर धारी ,
कीनर बन समय बीताते है ।।
उकार ये सब कुछ ईस्वर का ,
सच्चे सन्त यही बताते है ।
लोब झूठ कपट को छोड़ो ,
साँवरिया साथ निभाते है ।।
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