
मारा मनवा जीवडलो हिलोरा खाय,
दोहा – भक्त बीज पलटे नही,
जो जुग जाये अनंत,
ऊंच नीच घर अवतरे,
वो रहे संत रो संत।
भगती बेटी संत री,
जहाँ भेजे वहां जाय,
अरे बिना भगती रेवे नही,
भगती घर आ जाय।
मारा मनवा जीवड़लो हिलोरा खाय,
मारा मनवा हालो हालो गुरूजी रे द्वार,
मारा गया हालो हालो गुरूजी रे द्वार।।
अरे ए जी मारा मनवा,
कागदीया लिख भेजो दोई चार,
मारा मनवा,
इन रे अवसरीये वेगो आव,
लम्बा लटीया ने काला केश,
हालो हालो गुरूजी रे द्वार,
जीवडलो हिलोरा खाय।।
अरे हा रे मारा मनवा,
अरे हा रे सुरता बेनडली,
अरे पीवरीया रा भाई बंधु,
छोड अरे पीवरीया रा भाई बंधु,
छोड सुरता बेनडली,
सासरीये जावो रे राखो कोड,
सुरता बेनडली सासरीये जावो रे,
राखो कोड मारा मनवा,
हालो हालो गुरूजी रे देश।।
मीरा बाई ने गुरूजी आस,
गुरू मिलीया ओ रविदास,
मारा मनवा हालो हालो गुरूजी रे देश।।
गायक – शंकर टाक जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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