
मुझसे तो हर रिश्ता श्याम निभाता है,
जाने कौन से जन्मो का ये मेरा नाता है,
यार सखा भाई कभी ये बन जाता है,
तर्ज – तुझको ना देखूं तो दिल।
ममता की लोरी गाकर सुलाता,
हर गम पिता की तरह उठाता,
भाई सखा ये बनकर के मेरा,
दूर करे हर मुश्किल का घेरा,
भाई बड़ा बन के कभी ये समझाता,
देखा है जब से खाटू नगर को,
भुला हूँ दुनिया के हर शहर को,
माथे से माटी इसकी लगाऊ,
कहता है दिल ना खाटू से जाऊ,
खाटू मुझे आकर के चैन आता है,
मुझ पे करम ये इसका हुआ है,
पूरी हुई हर दिल की दुआ है,
खाटू दरबार ही मेरा संसार है,
‘शर्मा’ का सब कुछ श्याम सरकार है,
हर ग्यारस पर मुझको खाटू बुलाता है,
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