
मुझे ऐसा तू चश्मा लगाई दे
मुझे कान्हा ही कान्हा दिखाई दे
मुझे ऐसा तू चश्मा लगाई रे
इतनी कमजोरी है मेरी आंखें
कैसे देखूं नजर ना आवे मेरे
नैनों में ज्योति जगाई रे
मेरी आंखों में छाया अंधेरा
मुझे कान्हा की यादों ने घेरा
मेरे दिल में वो दीपक जलाए दे
चाहे हमको तू अंधा ही रखना
जरा इतना करम हम पर करना
हमको इतना तो पागल बनाई दे
मुझे कहना ही कान्हा दिखाई दे
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