
ये भगवा रंग, रंग रंग,
जिसे देख जमाना हो गया दंग,
जिसे ओढ़ के नाचे रे बजरंग,
मुझे चढ़ गया भगवा रंग रंग,
ये भगवा रंग है ऋषि मुनि,
और संतो का,
हिन्द के वीर बलियो का,
और महंतो का,
ये रंग रंग लिया माँ भारती के,
वीर लालो ने,
नही घुल सकता है ता जिंदगी,
नदियों ना तालों में,
ये वो रंग है जो जनक लली के,
मस्तक से आया है,
जिसे अंजना के लल्ला ने,
चोले में लगाया है,
ये वो रंग है जो श्री राम जी के,
मन को भाया है,
अवध को छोड़ते समय प्रभु ने,
तन रंगाया है,
सुनो जी पार्थ को भारत भूमि में,
यह रंग चढ़ गया,
न्याय और नित के पीछे वो,
अपनो से लड़ गया,
स्वर – शहनाज़ अख्तर।
प्रेषक – सिंगर राज पांचाल।
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