
मुनिराज जी तपधारी,
पहाडों में भक्ति थे किनी,
शमशेर गिरिजी तपधारी,
मुनिंराज जी तपधारी रे ए हा।।
अरे अमरकोट मे जन्म आपरो,
अमरकोट मे जन्म आपरो,
सखीया मंगल गावे भारी,
राजा रामसिंह पिता आपरा,
माता रूपादे माँ थोरी,
अरे अमरकोट सु आप पधारीया,
अमरकोट सु आप पधारीया,
आया आबूगढ रे माई,
तपस्या किनी हद भारी,
अरे सिद्ध तपस्वी संत कहाया,
सिद्ध तपस्वी संत कहाया,
कठोर तपस्या किनी भारी,
अरे वास्थानजी मे लिनी समाधि।
वास्थानजी मे लिनी समाधि,
पौष मास सातम् भारी,
वास्थानजी मे मेलो भरीजे,
दर्शन आवे नर नारी,
हर साल थोरो मेलो भरीजे,
छठ सातम् आठम् भारी,
मुनिराज जी रो हद भारी,
अरे बग गाँव में मेलो भरीजे,
केर गाँव में मेलो भरीजे,
जिला सिरोही है हद भारी,
अरे भक्त हजारो आवे द्वार पर,
भक्त हजारो आवे द्वार पर,
ले आशा मन में थोरी,
ले मन में आशा भारी,
अरे लाखो संत आवे आपरे,
लाखो संत आवे आपरे,
धुणी रमावे हद भारी,
अरे मुनिराजजी रा परचा पड रया,
मुनिराज जी रा परचा पड रया,
ज्योत जागे है हद भारी,
अरे “मनीष सीरवी” रचना बनायी,
मनीष सीरवी रचना बनायी,
आयो शरने मै थोरी,
जुग जुग शरनो मे राखो बापजी,
आप बडा हो उपकारी,
अरे बग गाँव सु बालक आपरे,
बग गाँव सु बालक आपरे,
‘चौधरी प्रकाश’ गावे भारी,
मै तो शरणे आपरी आयो,
नैया पार लगावो म्हारी,
गायक – प्रकाश चौधरी बग सिरोही।
लेखक / प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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