
मुश्किल है सहन करना
मुश्किल है सहन करना यह दर्द जुदाई का,
मुझे इतना बता प्यारे कारन रुसवाई का,
झूठे तेरे वादों पे इतबार क्या हमने,
तेरी कृपा को सुन करके अरे प्यार किया हमने,
क्या यही सिला मिलता तेरी प्रीत लगाई का,
मुझे इतना बता प्यारे कारण रुसवाई का,
मुश्किल है सहन करना..........
अगर नजर में अवगुण थे तो क्यों अपनाया था,
जे प्रीत न निब सकती पहले न बताया था,
मौका तो दिया होता मेरे मीत सफाई का,
कृपा की ना होती जो आदत तुम्हारी,
तो सुनी ही रहती अदालत तुम्हारी.
ना हम होते मुल्जिम,
ना तुम होते हाकिम,
ना घर घर में होती इबादत तुम्हारी,
झूठे तेरे वादों पे एतवार किया हमने,
तेरी किरपा को सुन कर ही अरे प्यार किया हमने,
क्या यही सिला मिलता एक प्रीत लगाई का,
तुम सा कोई मिल जाता तो दुन्ध लिए होते,
क्यों प्यार तुम्हे करते क्यों तेरे लिए रोते,
कज ते घर बाहर विधाम क्यों,
अगर मोहन तेरा इशारा ना होता
रहते हम भी भव सागर में अगर पहले किसी को उबारा न होता,
मुख मोड़ के क्यों बेठे क्या मान खुदाई का,
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