
मेरी छोटी सी है नाव, तेरे जादू भरे पाँव,
डर लागे मोहे राम, कैसे बिठाऊँ तुम्हें नाव में.......
जब पत्थर से बन गई नारी, ये तो लकड़ी की नाव हमारी,
करूँ यही रोजगार, या से पालूँ परिवार, सुनो सुनो जी दातार,
कैसे बिठाऊँ तुम्हें नाव में.......
एक बात मानो तो बैठा लूँ, तेरे चरणों की धूल धुवाऊँ,
यदि तुमको हो मंजुर, बात मेरी ये हुजुर, मेरा होय अंदेशा दूर,
केवट चरणों को धोये, पाप जन्म जनम के धोये,
होके बडे परसन, किये राम दरशन, संग सिया लक्ष्मण,
चरणामृत सबको पिलाऊँ, फल फूल मैं भेंट चढाऊँ,
ऐसा समय बार बार, नहीं आता सरकार, सुनो सुनो प्राणाधार,
धीरे धीरे से नाव चलाता, वो तो गीत खुशी के गाता,
कहता मन में यही बात, हो न जाए कॅंही रात, सूरज सुन लो मेरी बात,
ले लो मल्लाह ये उतराई, मेरे पल्ले कछु नहीं पाई,
ये तो कर लो स्वीकार, तेरा होगा बेडा पार, होगी जग में जय जयकार,
जैसे तुम खेवटिया, वैसे हम है, भाई भाई से लेना शरम है,
हमनें किया नदी पार, करना तुम भवसागर पार, परमानन्द की पुकार,
अपलोड - रवि सेन नरसिंहगढ़ "पांजरी"
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