
मेरे घर में थाली बजगी री,
तेरी दया तं अम्बे।।
मेरी सासड़ घुटी प्यावः,
मेरी नणदी कवर झुलावः,
महारः नीम्ब की डाली टंग री,
सब गावं जच्चा जकड़ी,
कोए लयावः झुला तगड़ी,
मेरी सोई किस्मत जग गी री,
जच्चा की जीब चटोरी,
मन भावः जलेबी पुरी,
मेरे मन की चिंता भग गी री,
मै ओढ़ पीलीया जांऊँ,
मंदिरां में जोत जगाऊँ,
मै तेरी भक्ति मे लग गी री,
अशोक भक्त अज्ञानी,
अम्बे की हुई दीवानी,
तुं ह्रदय के महां सजगी री,
गायक – नरेंद्र जी कौशिक।
प्रेषक – राकेश कुमार जी
खरक जाटान 9992976579
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