
चंदा छुप जा रे बादल में मेरे राम गए वनवास,
मेरे राम गए वनवास, मेरे लखन गए वनवास,
आगे आगे राम चलत है,
पीछे पीछे लखन चलत है,
बीच में चलत जानकी मात मेरे राम गए वनवास,
जंगल में वो भटकते फिरते,
कंदमूल से पेट को भरते,
रोवे भरत अवध में आज मेरे राम गए वनवास,
गंगा जी के तट पर जाते,
केवट सेवर नाव मांगते,
हमको जाना परली पार मेरे राम गए वनवास,
पंचवटी पर कुटी बनाई,
रावण ने वहां सिया चुराई,
बन बन ढूंढ रहे भगवान मेरे राम गए वनवास,
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