
मेरे लक्ष्मण के,
तू प्राणो को बचाने आजा,
लाके संजीवन,
वादा अपना निभाने आजा,
आजा आजा आजा आजा।।
तर्ज – लेके संजीवनी संकट को।
भाई लक्ष्मण के बिन,
अयोध्या कैसे जाऊंगा,
माँ सुमित्रा को,
मुख मैं कैसे तो दिखाऊंगा,
पूछेगी मुझसे लाल मेरा,
कहाँ छोड़ आए,
दिल के टुकड़े को,
कहाँ मेरे तुम तो तोड़ आए,
डूबती राम की नैया को,
बचाने आजा,
सुबह से पहले,
मेरे बाला जो तू ना आए,
भाई लक्ष्मण के संग,
मुझको भी मारा पाए,
इक भरोसा है मेरा तुझपे,
ओ बजरंगबलि,
तेरे होते तो मेरे सिर से,
विपदा सारी टली,
लाज विश्वास की तू,
फिर से बचाने आजा,
हे रवि देवा कल सुबह तुम,
उदय ना होना,
तुम जो आए तो पड़े मुझको,
उम्र भर रोना,
आज तक तुमने,
लाज मेरी तो बचाई है,
अब बारी क्यों,
देर तुमने तो लगाई है,
अपने भगवान,
अपयश से बचाने आजा,
वादा अपना तो,
श्री हनुमतजी निभा आए,
बूटी वाला ही वो तो,
पर्वत ही उठा लाए,
राम ने तुमको,
अपने ह्रदय से लगाया है,
तुमको भाई के जैसा,
राम ने बताया है,
ऐसे ही भक्तो की डूबी,
नैया तिराने आजा,
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