
मेहंदी रे मेहंदी इतना बता दे,
कौन सा काम किया है,
मैया ने खुश होकर तुझको,
हाथो में थाम लिया है,
मेहंदी बोलो ना, मेहंदी बोलो ना,
तर्ज – माई नी माई मुंडेर पे तेरी।
तेरी किस्मत बहुत बड़ी है,
मैया ने अपनाया,
मैया तुमसे प्यार करे क्यूँ,
कोई जान ना पाया।
मैया की किरपा होने से,
दुनिया में नाम किया है,
लाल चुनरिया लाल ही चुड़ा,
लाल रोली का टीका,
लेकिन मैने देखा माँ का,
हाथ था फीका फीका।
इन फीके फीके हाथों को,
मैने लाल किया है,
इसीलिए मैया ने मुझको,
अपना मान लिया है,
सबको अपनाया मेरी मैया,
हमको भी अपना लो,
हमको अपना लाल समझकर,
अपनी गोद बिठा लो,
‘बनवारी’ ये भेद अनोखा,
मेने जान लिया है,
मैया अपनाएगी उसको,
जो माँ को लाल किया है,
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