
नचना वी इबादत बन जांदा
जे नचने दा भगतो ढंग होवे
रंग उस उत ही चडदा ऐ
जिहनू माँ दा चड़ेया रंग होवे
जो करदा मेरा दातिये नच नच ख़ुशी मनावा
पैरा विच पा के घुंगरू मैं जोगन बन जावा
मसा मसा भागा वाली रात अज आई ऐ
पूरी मेरी सुखना किती महा माई ऐ
क्यों न अपने नाल मैं जय हो सब नु अज नचावा
वेहड़े विच अज मेरे वजिया शेहनाईआ ने
वारी वारी संगता देंदिया वधाई आ ने
वेख के लगियां रोनका जय हो दिल दियां रीझा लाहवा,
शेरा वाली आप आई घर मेरे चल के
मैं ता दीदार वी न कर स्की रज के
चरण धुल मैं मैया दी जय हो चूम चूम मथे लावा
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