
मैं तो दीवाना भोले का दीवाना,
फिरता था एक पागल सड़को पे मारा मारा,
रहता था अलग सबसे दुनिया से कर किनारा,
एक गोल काला पत्थर रखता था संग हरदम,
सर पे उठा के गाता होकर मगन वो बम बम,
पूछा किसी ने उससे क्या नाम है तुम्हारा,
रहते हो किस जगह पे क्या काम है तुम्हारा,
कहने लगा वो हस के क्या जानते नहीं हो,
भोले का हूँ दीवाना पहचानते नहीं हो,
दीवाना दीवाना, दीवाना दीवाना,
दीवाना दीवाना, दीवाना दीवाना, ना ना ना
दीवाना मै तो दीवाना भोले का दीवाना,
जिसका ब्रम्हा भी दीवाना,
जिसका विष्णु भी दीवाना,
जिसका नारद भी दीवाना,
जिसका शारद भी दीवाना,
जिसका दीवाना राम है,
जिसका दीवाना श्याम है,
भोले का मैं दीवाना दर पे है उनके जाना,
चौखट पे जाके जिनकी झुकता है ये जमाना,
अरे दीवाना दीवाना, दीवाना दीवाना,
जिनको कहते है शिव दानी,
जिनका भोले जी नाम है,
जिनके हाथों में सारे जगत का इंतजाम,
जगत का इंतजाम,
देता है दान अमृत पीता है विष का प्याला,
कहलाता है जो भोले शंकर त्रिशूल वाला,
है काम जिसका बिगड़ी सदा सबकी बनाना,
मैं चाहता हूँ उनके चरणों से लिपट जाना,
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