
मैं हु मैया का सरवेंट
करता हु मैं माँ की नोकरी करता परमानेंट,
ना चाहू मैं रुपिया पैसा न ही डॉलर सेंट
ना ही कोई कंडीशन है न ही कोई एगरीमेंट
दुनिया की मोह माया छोड़ी माँ की शरण में आया,
वेतन मिल गया पूरा जब मैं माँ का दर्शन पाया
सदा मांगता मैया से मैं जब भी हो अर्जेंट
जब से माँ की मिली नोकरी कभी न घाटा पाया
चाहू जिनती मिले सेलैरी सदा ही नाफा आया
मैया जी की चरण चाकरी बड़ी है एक्सीलेंट
केशव शर्मा की भी अर्जी जल्दी पास कराओ
केहता कुर्मी अमन मुझे भी चरणों में बिठाओ
करता सर्विस परमानेंट माँ को जपता मैं अर्जेंट
माँ है सब से इम्पोर्टेन्ट केशव किया है एग्रीमेंट
मैंने किया है एगरीमेंट
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