
म्हारा बाल गोविन्दा जी म्हारे घर रमवा आओ जी
ओ म्हारा बाल गोविन्दा जी, के म्हारे घर रमवा आजो जी,
ओ ठाकुर छैल छबीला जी, के म्हारे घर रमवा आजो जी,
रमवा आजो जी के लाजो सखी सहेली जी,
लाडू मंगइ दु पेड़ा मंगइ दु साथ मे माखन मिश्री जी॥
म्हारा मन मे ऐसी आवे,के छप्पन भोग जीमई दु,
हाथ दुलाये दू पाओ दुलाये दू और दुलाये दू तुम्हारा मुंडल जी॥
म्हारा मन मे ऐसी आवे,के अपने हाथ नाल्ये दू
चमअरी धुल सिलाय्दु रंग राधा की टोपी जी॥
म्हारा मन मे ऐसी आवे,के अपने हाथ पिराये दू,
राधा बुलइ दु रुकमणी बुलइ दु और बुलइ दु सतभामा जी॥
म्हारा मन मे ऐसी आवे ,म्हारा मन मे ऐसी आवे के संग मे रास रचइ दु,
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