
रस बरसे तेरे भवन में माँ रस बरसे,
रस बरसे ओ रस बरसे,
मृदङ्ग बाजे ढोलक और छैणा,
पिए अम्रत सारे रस बरसे,
जगमग जगमग ज्योति जगी है,
गूँज रहे जयकारे रस बरसे,
चंदन की चौकी बैठी भवानी,
झोलियाँ भरते सारे रस बरसे,
भक्तों पे तेरी कृपा हो भवानी,
मस्ती में नाचे सारे रस बरसे,
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