
रातिजगो मान लिज्यो घरका को,
यो पाटा भरा दियो पितरा को।।
नौ महिना माता दुख पायी,
उंधो र झुल्यो गरभ क माही,
यो तो विकट काम छो खतरा को,
पाटो भरा दिया पितरा को।।
पुरा दिन हुया पीड चलाई,
दाई माई न तुरन्त बुलाई,
या तो पिंड छुडा दिया अबला को,
परभातिया थारो जनम हुयायो,
कंचन सोना को थाल बजायो,
दिल खुशी हो गयो घरका को,
बहिन भुआ न थार नुत बुलाया,
सांठ्या बांदरवाल बंधाया,
हुयो मंगलाचार लुगायाँ को,
बडा बडा पंचा न बुलाई,
चुडा मांदल्या को मुर्हत कढाई,
जोशी टको माँग लियो पतडा को,
भक्त मंडल पितरा न मनाव,
आई मावस खीर बनाव,
थे तो घरका सु आंतरो मत राखो,
प्रेषक – धरम चन्द नामा सांगानेर।
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