
रुच मुच करे सिंगार वो दाई ॥
चढ़ - नव रूप के अवतारी बनके
लिये दुर्गा अवतार...रुच मुच करे
बइठे हावस बघवा सवारी,रूप लगथे मन भावन
जइसे कुटेस सुरुज हर चमके,बरनत बने न गावान
देख के अंतस लहस जात हे हिर्दय लागे जुड़ावन
जागे हमर पुरखा के भाग ह,चिन्हा देथे चिन्हावन
॥सारधा भक्ति के रूप ल धरके, देहस अपन दुलार ॥
बगबग चमके लाली चुनरिया,पावे माहुर हे लाली
रुमझूम रुमझूम पाव के पैरी, चमके खिनवा बाली
हाथ के छुरी खन खन बाजे,सात सुरु जस ताली
महकत हावय फूल के गजरा,लाये हे बनमाली
॥भगत सेउक मन लाने हावय, लेबर तोर दुलार ॥
आँखी म आंजे करिया काजर,नाक में नथनी सुहाये
दुलरी तिरली चोरली माला,गला म ओर माये
कनिहा म पहिरे करधनिया, हाथ म बहुटा सजाये
आनी बानी के जेवर गहेना, दाई तोर बर लाये
॥ओरमा झोरमा ओरमा येहे, गौतम के फूल हार ॥
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.




