
तेरी दो दिन की जिन्दगानी,
प्राणी भजले नाम हरि का,
है ये दुनिया आनी जानी,
तू ने मैली चादर करदी,
सर पे पाप की गठरी धरली,
कुछ सोचा न,समझा न,
उमर ही गँवा दी,
तर्ज – अब चाहे माँ रूठे या बाबा।
दो दिन की तेरी है जवानी,
क्यो करता है फिर नादानी,
क्यो अकड़ता है तू योवन पर,
ढल जाएगी एक दिन ये प्राणी,
हरि का नाम भज,
सभी अभिमान तज,
लेले चरणो की रज,
दुनिया मे न फँस,
तेरी नैया बीच भँवर मै,
नाम धन की तू करले कमाई,
गुरू चरणो मे आ मेरे भाई,
किसी के काम दौलत न आई,
सारी दुनिया ही इसमे समाई,
नाम मे मन लगा,
कर न खुद से दगा,
होगी फिर क्या सजा,
तू क्या जाने भला,
अब तू छोड़ भी दे,
मनमानी,
सुमिरन मे मगन हो जा प्यारे,
देख दुनिया मे फिर तू नजारे,
तेरी दुनिया बदल जाए पल मे,
रहे गुरुवर के जो तू सहारे,
अब तू न कर आना कानी,
– भजन लेखक एवं प्रेषक –
श्री शिवनारायण वर्मा,
मोबा.न.8818932923
वीडियो अभी उपलब्ध नहीं।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.



