
लगावः बाबा का दरबार,
गुरू मुरारी का चैला,
शनि मंगल ने चौकी लावः,
दुर दुर तं दुखिया आवं,
हो ना होवण दे लाचार,
सुरजमल भक्त स निराला,
सब भक्तां का देखया भालया,
पुजः जिनते पवन कुमार,
जिसकी सुरती बजरंगी में,
रहता ना वो कदे तंगी में,
पा गया हनुमान का प्यार,
कप्तान शर्मा देखया नजारा,
बह कंजावला अम्रत धारा,
गावः कौशिक जी तो मल्हार,
भजन प्रेषक – राकेश कुमार जी,
खरक जाटान(रोहतक)
वीडियो उपलब्ध नहीं।
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