
वर दे वीणा वदानी अज्ञान दूर करदे,
सिर पे मेरे हे मैया तू अपने हाथ रखदे,
मोह अज्ञान और तिमर को ,
जीवन से दूर करदे,
बिगड़ी मेरी बना दे किस्मत मेरी जगा दे ,
स्वर में मेरे हे मियां तू मीठे रस भरदे,
धुप दीप फल और मेवा से करता हु तेरा पूजन ,
हे ममता मई तेरी वंदन है तेरा वंदन ,
बक्शो गुनाह मेरे मुझपर भी दया करदे,
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