
शक्ति व शिव जी,
है वो निराकारी।
दोहा – शक्ति व शिवजी,
आकार बणाई कुम्हार ने,
किरपा करी करतार।
पिण्ड़ बणाई कुम्हार,
सुदर्शन चकरी पे।।
पाणी रे गारो लाद रे बानी,
और चढायो वांपे रंग,
मांड़ियां वो मांड़णा मात श्रीयादे,
सिद्धो जी चढावे सिणगार,
आवड़े पकाई अखण्ड कराई,
अमर वेगी सदा पिण्ड़,
महिमा महेश्वर अपरमपारी,
सिमरे ‘रतनलाल’,
शक्ति व शिवजी,
गायक – पं.रतनलाल प्रजापति।
निर्देशक – किशनलाल जी प्रजापत।
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