
शान्तिनाथजी कह गये बीरा,
सब भक्ता ने कईजो रे,
जालौरी पीरजी कह गये बीरा,
अरे नाथजी री मंशा भईया,
पीरजी मंशा भईया थे,
सुण लिजो रे सुणजो भक्त गणा,
नाथजी थाने यु समझावे रे,
सुणजो भक्त गणा।।
नसा पता री आदत बुरी,
मत मारो कालजीये छुरी,
कंचन वर्णि काया रे क्यु,
कलंक लगावो रे,
पीरजी थाने यु समझावे रे,
सतगुरुजी थाने यु समझावे रे,
टाबर टुबर सगला ही रोवे,
पुरखो री जागीरी खोवे,
बहन बेटी थारी रोती जावे,
मात पिता गणो दुख पावे,
क्यु आग लगावे रे,
दारु सु मरीयादा जावे,
दुख दालीदर घर मे आवे,
भाई सेण और भला मानस रे,
निजरा सु भी थु गिर जावे,
कालो मुडो है इण दारु रो,
मत हाथ लगावो रे,
बेटी थारी हुई सयाणी,
कद बनसी वा दुल्हन रानी,
कोडी-कोडी माया जोडी,
वा तो थे दारु मे तोडी,
इण दारु रो पापो काट दे
पी परणावो रे,
शान्तिनाथजी गुरु समझावे,
जो समझे परम सुख पावे,,
अन धन लक्ष्मी घर मे आवे,
मान गणेरो जुगत मे पीवे,
लिखे जोरावर गावे,
जोगेन्द्र थे सुण लिजो रे,
भजन प्रेषक –
मदनसिंह जोरावत राठौंड़ बागरा
फ़ोन – ६३७५४२९७२७
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