
शिव की बरात चढ़ी, सज्ज धज्ज के,
भोले की बरात चढ़ी, सज्ज धज्ज के,
सारियाँ ने भंग पी ली, रज्ज रज्ज के ॥
ढोल नगाड़े डंमरू वज्जदे,
ब्रहमा के संग विशनूं नच्चदे ॥
नच्च रहे राहू केतू ॥ डी जे वज्जदे,
शिव की बरात चढ़ी...
नारद से वीणा वज्जवाई
शिव भोले को मसती छाई ॥
गावे है दीवान देखो ॥ नच्च नच्च के,
आसमान से परियां आई
गौरां जी को खूब सजाई ॥
बनी है दुलहन गौरां ॥ सज्ज धज्ज के,
होन लग्गी फेरों की त्यारी
शिव गौरां की जोड़ी प्यारी ॥
खुशियाँ मनायो सारे ॥ नच्च नच्च के,
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