
शिव ने श्रृंगार किया है,
गौरा क्या बाकी,
गौरा हंस करके बोली,
सजन थोड़ा है बाकी,
शिव ने सिंगार किया है,
तर्ज – थोड़ा सा प्यार हुआ है।
सिर पर है मांग की मेहन्दी,
कान में पहने बाली,
लगा है आंखों में कजरा,
होंठ पर लगी है लाली,
नाक में पहने नथनी,
कहो अब क्या है बाकी,
पिया बिंदीं है बाकी,
साड़ी बनारस वाली,
कानपुर की है करधनी,
माला मद्रास का पहना,
शोभा क्या इसकी कहनी,
पांव में पहने पायल,
सजन बिछुआ है बाकी,
चोली चटक रंग वाली,
कमर में पेंदी पहनी,
साड़ी का सीधा पल्ला,
हाथ बाजूबंद पहने,
सजन चूड़ी है बाकी,
पूरा श्रृंगार किया है,
गोकुल प्रस्थान किया है,
भोले जी बने बहुरिया,
ऐसा श्रृंगार किया है,
चल रहे धीरे धीरे,
सजन घूंघट है बाकी,
गायक – नंदू जी मिश्रा।
प्रेषक – श्रीकृष्णानंद व्यास जी महाराज।
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