
शेरावाली तेरी चूनरिया लाई गोटेदार तेरे दरबार माँ ॥
लाई तेरे दरबार माँ, लाई तेरे दरबार माँ ॥
मेरी मनसा पूरी कर माँ, मेरी मनसा पूरी कर माँ,
तेरा करूँ आभार तेरे दरबार माँ,
कितने तार दिए तूमने, कितने तार रहीं हों माँ ॥
अपने भगतो कि खातिर दूषट मार रहीं हों माँ ॥
हमपर दया करों हे जननी, हमपर दया करों हे जननी,
लाई तेरा ऋंगार तेरे दरबार माँ,
ऊँचे पर्वत चड़ चड़ के पाँव हार रहें हैं माँ ॥
धूप कभी बारिश हो जा मोसम मार रहे हैं माँ ॥
बड़े जतन करके आईं हूँ, बड़े जतन करके आईं हूँ,
पाने तेरा दीदार तेरे दरबार माँ,
तेरी माया तू जाने मैं तो बस इतना जानू ॥
तू मेरे कुल की देवी मैं तो बस तूझको मानू,॥
दता की तूम बाह पकड़ लो, दता की तूम बाह पकड़ लो,
करों मेरा उद्धार तेरे दरबार माँ,
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