
शौर्यवान वीर हनुमान
पराक्रम से गूँजे त्रिभुवन,
धरती पातल दुस्ट भंजन,
जल सागर करे पराजय क्रन्दन,
त्रिकाल निरंतर लोक वन्दन,
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर,
जय किपिस तिहुँ लोक उजगर,
रामदूत अतुलित बल धामा,
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा.....
धरती पतल दुस्ट भंजन,
महाबली महा रूद्र महा वज्र,
शौर्यवान वीर हनुमान,
चेहरे से छलकती नम्रता,
असंखो में शांत चित की छाया,
तुम टेरेनानी टेरेना,
आँखों में शांत चित की छाया,
ऊपर है सुबह की लाली,
दिशा सिंदुरलिपि काया,
महाबीर बिक्रम बजरंगी,
कुमति निवार सुमति के संगी,
कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुंचित केसा,
हाथ बज्र और ध्वजा बिराजे,
कांधे मूंज जनेऊ साजे,
शंकर सुवना केसरी नंदन,
तेज़्ज़ प्रताप महा जग वंदन.....
विकत समय निकट जो आये,
प्रथम वहीँ स्मरण आ जाये,
हर विपदा वह दूर करे,
संकट मोचन तभी कहलाये,
शक्ति की नयी परिभाषा,
विराट विक्रमी रूप अनोखा,
लिये उठाये द्रोणगिरी और,
जग देखे लीला न्यारी,
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