
झूमे झूमे जी भगत,
मतवाला बनके,
श्याम दरबार में अमृत बरसे,
तर्ज – अंजन की सिटी में।
तन की सुध ना मन की सुध है,
जिसको देखूं वो बेसुध है,
पीले पीले रे श्याम रस,
प्याला छलके,
मस्ती ऐसी बरस रही है,
लगता है बस स्वर्ग यही है,
देखो देखो रे मस्ती,
अलबेली बरसे,
श्याम कुटुंब में शामिल होजा,
श्याम प्रभु की धुन में खो जा,
‘नंदू’ करे रे गुणगान,
पूरा पागल बनके,
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