
राधा राधा राधा राधा........
श्री राधा, श्री राधा,
जय राधा, जय राधा,
जय राधा, श्री राधा,
श्री राधा राधा राधा राधा........
एक बार राधा कहे,
प्राणी पावन होत,
हरि पधारे सांसुमन और,
जगे प्रेम की ज्योत,
सांवरो हृदय बिराजे,
मौर मूकट और बांसुरी,
पीताम्बर साजे.......
श्री वृन्दावन वास मिले हो,
प्रेम अगाधा,
तेरो हो जीवन कल्याण,
कहे एक बार जो राधा.....
परम स्नेह ही हरि कहे,
राधा को कर धाम,
ओह सोहे प्यारे अधिक,
रटे जो राधा नाम,
मेरो प्रानन सो प्यारो,
सत्य कहु ये नाम,
मेरो जीवन रखवारो......
बड़ा बाघी वो जीव,
सफल की निति ना देहि,
मेरो है परम स्नेही......
मग्न प्रेमरा सुनत हीं,
होत रसीले श्याम,
श्रवण हेत हरि दा शब्द,
त्याग देत निजधाम,
नाम राधा मतवाले,
पाछे पाछे फिरत,
नन्द के लाल ग्वाले.....
जा मुख सोहरि सुनत है,
राको शब्द रसाल,
प्रेम भक्ति निजकोष की,
देत ताहि तत्काल,
अ जो कहे करि ठगोरी,
पुरो मोल न दियो मति,
मति किनियो भोरी....
राधा......राधा.....
राधा राधा सुनत हरि,
पावे यथा सुख,
धन्य धन्य बलिहारि नाम,
श्री राधा जामूख......
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