
श्री रामलला की मंगलमय है आरती,
प्राणियों के जीवन को संवारती।।
तर्ज – श्री भागवत भगवान की है।
भक्तों के प्राण कौशल्या लाल,
ये अवधपुरी के राजा,
ये विष्णु के अवतारा,
हरि यही हरिहर भी यही,
इन चरणों की आरती,
भूमि का भार हरने को राम,
साकेत धाम से आए,
हरि राम रूप में आए,
बजरंग बली के प्राण यही,
उस प्राणपुंज की आरती,
भारत का मान रखने को राम,
एक बार तो फिर से आओ,
फिर सत्य सनातन लाओ,
हम सबका तो आधार यही,
उस परमपिता की आरती,
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