
श्री वृन्दावन धाम सुहाना लगता है,
दोहा – तेरे चरणों में माधव मुरारी,
सर अपना हम सब झुकाए हुए है,
हम सरीखे अधम पापियों को,
जो प्रभु आप अपना बनाए हुए है।
नंदगांव प्यारा बरसाना लगता है,
ये किलोल करती प्यारी यमुना मैया,
मस्तानों का यही ठिकाना लगता है,
श्री वृंदावन धाम सुहाना लगता है,
तर्ज – दूल्हे का सेहरा।
किससे पूछा जाए पता मनमोहन का मेरे,
कहां मैं ढूंढू वृंदावन बरसाने में तेरे,
यहां तो सारा गांव दीवाना लगता है,
नंद गांव प्यारा बरसाना लगता है,
सात जन्मों का नाता मैं जोड़ू मनमोहन,
नाम तुम्हारा जपू निरंतर आऊं वृंदावन,
जनम जनम का साथ पुराना लगता है,
जरूर देखें – मन चल रे वृन्दावन धाम।
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