
संकट में है अब गोपाल तेरा गौवंश पुकारे रे
संकट में है अब गोपाल,
तेरा गौवंश पुकारे रे,
दुष्टों से बचा लो प्राण,
तर्ज – आ लौट के आजा मेरे मीत।
जब जब भी विपदा पड़ी जगत पर,
ले अवतार बचाया,
कैसे बयाँ हो मेरी कहानी,
मुझको तो मूक बनाया,
मुझे आके बचा लो नाथ,
मेरा मांस और चर्बी ये चमड़ा,
सब व्यापार बना है,
हार गई है चींखे हमारी,
तू सरकार कहाँ है,
अब सुन लो करुण पुकार,
माँ कहते जो वो ही कन्हैया,
मेरा वध करवाए,
जब तक दुःख पिया मेरा फिर,
बोली मेरी लगाए,
अपने में फंसी है मेरी जान,
बन करके बाल गोपाल कन्हैया,
फिर से आना होगा,
कटती गैया तुम्हे पुकारे,
आन बचाना होगा,
अब धीर का रख लो मान,
स्वर – मयंक अग्रवाल।
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