
सबसे अलग है सबसे खरी है बड़ी रुतबे वाली तेरी नौकरी है
सबसे अलग है सबसे खरी है,
बड़ी रुतबे वाली तेरी नौकरी है,
कहते है वो जिसने सेवा करी है,
तर्ज – तेरा साथ है तो।
जिसने ये जीवन तुझपे है वारा,
बड़ी मौज में उसका चलता गुज़ारा,
जीवन की बगियाँ रहती हरी है,
आधे आधूरे थे मेरे सपने,
मुख मोड़कर बैठे मेरे थे अपने,
जबसे मिली श्याम तेरी चाकरी है,
जब जब मैंने हाथ फैलाया,
खाली नही श्याम तुमने लौटाया,
जब जब पसारी झोली भरी है,
ऐसा अनोखा मलिक है पाया,
सेवक का जिसने मान बढ़ाया,
अगले जनम की ‘रोमी’ अर्जी धरी है,
गायक / लेखक – सरदार रोमी जी।
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