
“शिव को जिसने जान लिया, हर दुख से पार हो गया,
जिसने जप लिया नाम भोले का, उसका उद्धार हो गया।”
“हर सांस में हो शिव का नाम, जीवन हो जाए सफल,
मन में हो शिव का ध्यान, हर दिन हो मंगल।”
सांसों की माला पे
सिमरु मैं शिव का नाम
अब तो दुनियादारी से है
मेरा क्या काम
शिव के रंग में ऐसी डूबा
बन गया एक ही रूप
शिव की माला जपते जपते
हो गयी सुबह श्याम
शिवजी मेरे दिल में बसे है
संग रहे दिन रात
अपने मन की मैं जानू
सब के मन की राम
शिवजी मेरे अंतर्यामी
शिवजी मेरे स्वामी
शिवजी के चरणों में अर्पण
ये जीवन तमाम
प्रेम पियाला जबसे पिया है
जी का है ये हाल
अंगारों पे नींद आ जाए
और कांटो पे आराम
1: इस भजन में “सांसों की माला” का क्या तात्पर्य है?
: इसका अर्थ है — हर सांस के साथ शिव का स्मरण करना, मानो सांस ही माला बन गई हो।
2: यह भजन किस भाव को दर्शाता है?
: शिव में पूर्ण समर्पण और भक्ति, जहाँ सांसारिक कार्यों से दूरी और आत्मा की शांति मिलती है।
3: क्या यह भजन किसी व्रत या साधना से संबंधित है?
: यह भजन आत्म-भक्ति और ध्यान साधना को दर्शाता है, विशेषतः सोमवार के दिन शिव आराधना में उपयुक्त है।
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