
सावन का महिना है मौसम भी सुहाना है,
मैया ने भुलाया है दरबार को जाना है,
ज़न्मो की प्यास मेरी आज मिट जायेगी,
चिंतपूर्णी मात मेरी मेरे पास आएगी,
ना मैया ने रूठना है ना मैंने मनाना है,
माँ के भगतो माँ से मांग लो आज दाती मेहरबान है,
आज माँ का ध्यान लगा लो आज माँ को सबका ध्यान है,
कोई खाली नही जायेगा आज भगवती ने ठाना है,
दर पे सब खड़े होंगे मैं भी खड़ा हूँगा,
सब के साथ चरणों में मैं भी पड़ा हूँगा,
सब के दिल की जाने माँ क्या सुनना सुनाना है,
जिस पर हो तेरी किरपा उसे कोई मिटा न सके,
तूने जिसको मिटाया है माँ उसे कोई बना न सके,
तेरी माया को कया समजे चंचल तो दीवाना है,
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